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Indian Politics: हर्ष फायरिंग मामले में राजू कुमार सिंह को राहत, दिल्ली हाईकोर्ट ने सजा निलंबित की

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | हर्ष फायरिंग मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने राजू कुमार सिंह की चार साल की सजा निलंबित कर दी है, जबकि दोषसिद्धि पर रोक की अर्जी पर सुनवाई जारी है।

नई दिल्ली, 29 सितंबर: बिहार के साहेबगंज से विधायक राजू कुमार सिंह से जुड़े 2018 के हर्ष फायरिंग मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी चार साल की सजा को निलंबित कर दिया है। हालांकि, निचली अदालत की दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग अलग मामला है और उस पर तत्काल राहत नहीं दी गई है। हाईकोर्ट के 27 जुलाई के आदेश के अनुसार, अपील की अंतिम सुनवाई निकट भविष्य में होने की संभावना नहीं होने को ध्यान में रखते हुए सजा निलंबित की गई।

मामला 31 दिसंबर 2018 की रात दक्षिण दिल्ली के फतेहपुर बेरी इलाके स्थित एक फार्महाउस में आयोजित नववर्ष समारोह के दौरान हुई गोलीबारी से जुड़ा है। इस घटना में डॉ. अर्चना गुप्ता की गोली लगने से मौत हुई थी।

चार साल की सजा हुई थी

दिल्ली की विशेष अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद राजू कुमार सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 पार्ट-2 के तहत दोषी ठहराया था। इसके अलावा आर्म्स एक्ट की धारा 30 के तहत भी दोषसिद्धि हुई।

4 जुलाई 2026 को अदालत ने उन्हें धारा 304 पार्ट-2 के तहत चार वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई थी। आर्म्स एक्ट के तहत उन्हें दो महीने के कारावास की सजा भी दी गई। साथ ही मृतका के परिवार को देने के लिए 25 लाख रुपये मुआवजा जमा करने का निर्देश दिया गया था।

हाईकोर्ट ने सजा निलंबित की

निचली अदालत के फैसले के खिलाफ राजू कुमार सिंह ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दाखिल की। इसके साथ ही सजा निलंबित करने के लिए आवेदन भी दिया गया।

27 जुलाई को न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ ने सजा निलंबित करते हुए 25 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक स्थानीय जमानती की शर्त रखी। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि 25 लाख रुपये की मुआवजा राशि हाईकोर्ट रजिस्ट्री में जमा की जाए। आदेश के मुताबिक मृतका का परिवार इस राशि को निकाल सकेगा।

अदालत ने सजा निलंबित करने के पीछे यह भी माना कि अपील की अंतिम सुनवाई निकट भविष्य में होने की संभावना नहीं है।

दोषसिद्धि पर रोक का मामला अलग

इस मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी अंतर है। हाईकोर्ट ने चार साल की सजा निलंबित कर दी है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि निचली अदालत की दोषसिद्धि खत्म हो गई या उस पर रोक लग गई।

दोषसिद्धि पर रोक की मांग वाली अर्जी पर अलग से सुनवाई होनी है। हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा था और मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया। इसलिए फिलहाल दोषसिद्धि का निचली अदालत का फैसला अपील में चुनौती के अधीन है।

घटना में क्या हुआ था?

अभियोजन के अनुसार, 2018 की नववर्ष पार्टी के दौरान फार्महाउस में जश्न के बीच फायरिंग हुई थी। इसी दौरान डॉ. अर्चना गुप्ता को गोली लगी और उनकी मौत हो गई।

हाईकोर्ट में अपील पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने रिकॉर्ड पर मौजूद गवाही और फोरेंसिक साक्ष्य को लेकर कई तर्क रखे। आदेश में दर्ज है कि बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि यह स्पष्ट रूप से स्थापित नहीं है कि मृतका को लगी गोली आरोपी द्वारा कथित रूप से चलाई गई पिस्तौल से ही चली थी। अभियोजन पक्ष की ओर से इन दलीलों का विरोध किया गया था।

अब आगे क्या होगा?

अब इस मामले में राजू कुमार सिंह की अपील और दोषसिद्धि पर रोक की मांग पर आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। हाईकोर्ट में अपील लंबित रहने के दौरान चार साल की सजा निलंबित है, जबकि निचली अदालत की दोषसिद्धि पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है।

इसलिए मौजूदा स्थिति को सजा निलंबित होने की राहत के रूप में देखना उचित है, न कि दोषसिद्धि समाप्त होने के रूप में।

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2018 के नववर्ष समारोह के दौरान हुई गोलीबारी में डॉ. अर्चना गुप्ता की मौत के मामले में निचली अदालत ने राजू कुमार सिंह को दोषी ठहराते हुए चार साल की सजा सुनाई थी।

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